कहानियाँ संग्रह
विद्यालय के पुस्तकालय में अनाया को एक पुरानी विज्ञान-पुस्तक मिली। उसने पुस्तक के भीतर रखे नोट से जाना कि पास के तालाब में कई स्थानीय पक्षी आते हैं। अगले रविवार वह अपने सहपाठियों के साथ वहां गई
पक्षियों की सूची बनाई और पुस्तकालय में एक छोटा प्रकृति-कोना शुरू किया।
गर्मी बढ़ने पर आरव ने देखा कि स्कूल के बगीचे की मिट्टी सूख रही है। उसने रसोई में बचा साफ पानी पौधों के लिए जमा करने का सुझाव दिया। कुछ ही दिनों में कक्षा के सभी बच्चे बारी-बारी से पौधों को पानी देने लगे और बगीचा फिर हरा हो गया।
बस में एक बुजुर्ग यात्री अपना रास्ता भूल गए। कंडक्टर ने जल्दबाजी करने के बजाय उनका पता ध्यान से सुना और सही स्टॉप पर उतरने में मदद की। यात्री ने धन्यवाद कहा
और बाकी यात्रियों ने भी जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सहायता करने का निश्चय किया।
मीरा की कक्षा को विज्ञान प्रदर्शनी के लिए एक छोटा रोबोट बनाना था। उसने पहियों और पुराने डिब्बों का उपयोग किया
जबकि उसके साथियों ने तार जोड़ने और चित्र बनाने में मदद की। रोबोट पूरी तरह सीधा नहीं चला
लेकिन टीम ने अपनी गलतियों से सीखकर परियोजना समझाई और सबने मिलकर पुरस्कार जीता।
गांव के पास एक घोड़ा रास्ते में थककर बैठ गया। बच्चों ने उसे घेरने के बजाय दूरी बनाए रखी और बड़े लोगों को बुलाया। पशु-चिकित्सक ने जांच कर उसे पानी और आराम दिया। कुछ दिन बाद घोड़ा स्वस्थ लौटा
और बच्चों ने सीखा कि जानवरों की मदद सावधानी से करनी चाहिए।
खेल के मैदान में बारिश के बाद पानी भर गया था। कप्तान ने शिकायत करने के बजाय साथियों के साथ नालियों से पत्ते हटाए और मैदान सूखने तक अभ्यास की नई योजना बनाई। जब खेल का दिन आया
टीम समय पर तैयार थी और सबने मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया।
चित्रा नई छात्रा थी और उसे कक्षा में बोलने में झिझक होती थी। शिक्षक ने उसे चित्रों के माध्यम से अपना विचार दिखाने का अवसर दिया। उसकी प्रस्तुति देखकर सहपाठियों ने प्रश्न पूछे और उसे समूह में शामिल किया। चित्रा ने जाना कि सीखने और भाग लेने के कई तरीके होते हैं।
कस्बे के लोगों ने खाली जमीन पर सब्जियों का साझा बगीचा बनाया। किसी ने बीज दिए
किसी ने पानी की व्यवस्था की और बच्चों ने पौधों के नाम लिखे। फसल तैयार हुई तो परिवारों ने सब्जियां बांटीं और अगली बार के लिए खाद बनाने का तरीका भी सीखा।